Saturday, 25 February 2012

जोवर !

मैं बता नहीं सकता मेरे अंदर किस तरह की  हलचल हो रही  है . ख़ुशी और गम साथ -साथ हैं. 
ख़ुशी इसलिए की ये "उप्रुम जुमुर " हो रहा  है और गम इसलिए की  मैं  इसका  हिस्सा  नहीं बन पा रहा  होऊं .

अभी मैं Goa में होऊं और अपनी मशरूफीयत के कारन इस पल अपना योगदान नहीं दे पा रहा होऊं .

अपनी तरह के अनोखे   इस पहले  "उप्रुम जुमुर " में  जिसे शायद पहली  बार  फेसबुक और इंटरनेट  के माध्यम से प्रचार -प्रसार कर मनाया जा रहा है .

सभी लोगों को मेरी ओर से हार्धिक अभिनन्दन .

  

Saturday, 23 July 2011

उन आखों का हसना भी क्या जिसमे आसूं  ना हो 

Tuesday, 5 July 2011

जनआक्रोश रैली

दिनांक ४ जुलाई को चाईबासा में हर उम्र के लोगो ने बढ-चढ़ कर हिस्सा लिया,और लोगो ने प्रशाशन को बता दिया की वो आपने आधिकारो और कर्तव्यों के प्रती जागृत हो चूका है .

मौका था  चाईबासा से लगे हुए १३ विभिन्न राजस्व  गाँव  को नगरपालिका में शामिल करने  के विरोध में जनआक्रोश रैली. हर उम्र और तबके के लोगों  ने इसमे हिस्सा लिया.क्या बच्चे क्या बूढ़े, पुरे १३गावों के सभी ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ रैली में शामिल हुए. तक़रीबन 6 की.मी.की रैली थी. पूरा चाईबासा  ठहर सा गया था.

 रैली गाँधी मैंदान से शुरु हुई और विभिन्न रास्तो से होते हुए DC कार्यालय गयी और अपनी मागौं के प्रती ज्ञापन दिया.
 प्रमुख मांगो के अलावा  विलकिंसन रुल, सी.एन.टी.एक्ट १९०८, समता जजमेंट आदी पर भी सबो ने आपना मत रखा.

 रैली को मानकी मुंडा संघ,आदिवासी हो समाज महासभा,आदिवासी हो समाज युवा महासभा, खुटपानी भूमी रक्षा समिती , कोल्हान पांचवी अनुसूची (अनुसूचित जनजाति रुदिजन्य विधि) अनुपालन समिति,कोल्हान रक्षा संघ आदी के बुद्धीजीवियों ने दिशा दी . 

Saturday, 23 April 2011

सच कहा आपने......हम खुद भी इन मामलो को भूल से गए थे....
याद दिलाने के लिए शुक्रिया........

जो  वहां रहते हैं उनके लिए जिन्दगी कितनी मुश्किल होगी ...
एक ओर माओवादी  और दूसरी ओर सरकारी महकमे का कहर ....

आप जिसकी की थोड़ी मदद करेंगे ,दूसरा आपको दुश्मन समझेगा ...
और क्योँकी वो आपका घर है ,आप उस जगह को छोड़ भी नहीं सकते ......

एक ओर कुआँ और दुसरे ओर खाई ........ कोई उपाय ...

जिन्दगी से डर लगता है ,,,,,,,,,

मगर ,  जिन्दगी तो तुम भी हो .........
..................... जिन्दगी   तो हम भी हैं .....................

तू रुसवा है तो लगता है ......मौत क्या हसीन होगी   ?
तू जो साथ है तो,  हर लम्हा जन्नत का सुकून देता है............

मगर  न जाने क्यों ........

   जिन्दगी से डर लगता है ...................

कभी किसी से वादा था मुस्कराने का.......................
........इसलिए हर गम पर मुस्कुराता  हु  ...........

मगर ए दोस्त ,,,,,,, मुस्कुराने की दुआ मत देना ...........
             मुझे पल भर मुस्कारने की सज़ा मालूम  है .......................







Friday, 22 April 2011

बस ये खेल दिलो का है .....
चलता ही रहता है ........
हजारों खुशियों के पल आये जिंदिगी में ....
पर क्योँ तन्हाई का वो पल खलता ही रहता है........
हम लाख हसें दुनिया के आगे ........
पर अन्दर तो कुछ जलता ही रहता है........
हम उनके एक इशारे के इंतज़ार में रहे.........
पर उनकी  नज़र इस तरफ मुढ़ी ही नहीं ....................
अनजाने में उस डोर की सलामती की दुआ मांगते  रहे........
जो डोर कभी उनसे जुडी ही नहीं.............................