Saturday, 23 April 2011

सच कहा आपने......हम खुद भी इन मामलो को भूल से गए थे....
याद दिलाने के लिए शुक्रिया........

जो  वहां रहते हैं उनके लिए जिन्दगी कितनी मुश्किल होगी ...
एक ओर माओवादी  और दूसरी ओर सरकारी महकमे का कहर ....

आप जिसकी की थोड़ी मदद करेंगे ,दूसरा आपको दुश्मन समझेगा ...
और क्योँकी वो आपका घर है ,आप उस जगह को छोड़ भी नहीं सकते ......

एक ओर कुआँ और दुसरे ओर खाई ........ कोई उपाय ...

जिन्दगी से डर लगता है ,,,,,,,,,

मगर ,  जिन्दगी तो तुम भी हो .........
..................... जिन्दगी   तो हम भी हैं .....................

तू रुसवा है तो लगता है ......मौत क्या हसीन होगी   ?
तू जो साथ है तो,  हर लम्हा जन्नत का सुकून देता है............

मगर  न जाने क्यों ........

   जिन्दगी से डर लगता है ...................

कभी किसी से वादा था मुस्कराने का.......................
........इसलिए हर गम पर मुस्कुराता  हु  ...........

मगर ए दोस्त ,,,,,,, मुस्कुराने की दुआ मत देना ...........
             मुझे पल भर मुस्कारने की सज़ा मालूम  है .......................







Friday, 22 April 2011

बस ये खेल दिलो का है .....
चलता ही रहता है ........
हजारों खुशियों के पल आये जिंदिगी में ....
पर क्योँ तन्हाई का वो पल खलता ही रहता है........
हम लाख हसें दुनिया के आगे ........
पर अन्दर तो कुछ जलता ही रहता है........
हम उनके एक इशारे के इंतज़ार में रहे.........
पर उनकी  नज़र इस तरफ मुढ़ी ही नहीं ....................
अनजाने में उस डोर की सलामती की दुआ मांगते  रहे........
जो डोर कभी उनसे जुडी ही नहीं.............................

Wednesday, 20 April 2011

देखिये तो लगता है , जिन्दिगी की राहो में एक भीड़ चलती है 
सोचीये तो लगता है,  भीड़ में है सब तन्हा............................

ये जो सारे रिश्ते हैं ,कांच के खिलौने हैं ..............................
पल में टूट सकते हैं , कौन जाने कब तन्हा ..............................