सच कहा आपने......हम खुद भी इन मामलो को भूल से गए थे....
याद दिलाने के लिए शुक्रिया........
जो वहां रहते हैं उनके लिए जिन्दगी कितनी मुश्किल होगी ...
एक ओर माओवादी और दूसरी ओर सरकारी महकमे का कहर ....
आप जिसकी की थोड़ी मदद करेंगे ,दूसरा आपको दुश्मन समझेगा ...
और क्योँकी वो आपका घर है ,आप उस जगह को छोड़ भी नहीं सकते ......
एक ओर कुआँ और दुसरे ओर खाई ........ कोई उपाय ...