Friday, 22 April 2011

बस ये खेल दिलो का है .....
चलता ही रहता है ........
हजारों खुशियों के पल आये जिंदिगी में ....
पर क्योँ तन्हाई का वो पल खलता ही रहता है........
हम लाख हसें दुनिया के आगे ........
पर अन्दर तो कुछ जलता ही रहता है........

No comments:

Post a Comment