देखिये तो लगता है , जिन्दिगी की राहो में एक भीड़ चलती है
सोचीये तो लगता है, भीड़ में है सब तन्हा............................
ये जो सारे रिश्ते हैं ,कांच के खिलौने हैं ..............................
पल में टूट सकते हैं , कौन जाने कब तन्हा ..............................
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